दलदल से सब सने हैं

चंद वर्षों में १४ करोड़ से हजारों करोड़ की सम्पत्ति के आसामी बने सुधीर शर्मा और दिलीप सूर्यवंशी की शासन-प्रशासन में गहरी पैठ है। नौकरशाह उनके इशारों पर नाचते हैं। वरना सरकारी महकमों की क्या मजाल कि आयकर विभाग को जानकारी देने में आनाकानी करे। ये समीकरण शर्मा और सूर्यवंशी व उनके आसपास के लोगों के यहां मिले सरकारी दस्तावेज से भी जुड़े हैं। दरअसल, इन्होंने उन सरकारी महकमों में अपने चहेतों को काबिज करवा रखा है, जिनसे इनका लेना-देना है। यह खबर भी मंत्रालय के गलियारों से होकर बाहर आई है। शायद इस बात से किसी को गुरेज न हो कि एक भ्रष्ट के इशारे पर भ्रष्ट अफसरानों को ही पदस्थ किया जा सकता है, जो उसके इशारों पर चलें। उक्त विभागों में निश्चित ही ऐसे लोग होंगे। पूरी व्यवस्था सड़ांध मारता दलदल प्रतीत हो रही है, जिससे कोई अछूता नहीं है। शर्मा और सूर्यवंशी से सत्ता-संगठन की नजदीकियां व शह जगजाहिर हो चुकी है। इसी दौरान विपक्ष से जुड़े जो समीकरण सामने आए, उनमें शर्मा बंधुओं से करीबियों का खुलासा हुआ है। जाहिर सी बात है दोनों प्रमुख राजनीतिक दल और नौकरशाही इस दलदल का हिस्सा है। यदि ऐसा नहीं है तो विपक्ष कभी अपनी प्रभावी भूमिका में क्यों नहीं आया। हाल ही में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी महासचिव बीके हरिप्रसाद ने सीबीआई से जांच कराने के लिए ताल ठोकी है, लेकिन क्या इस घोषणा पर अमल होगा? दरअसल, विधानसभा का मानसून सत्र सामने है। ऐसे में विपक्ष को कोई शिगूफा चाहिए, जिससे हाईकमान को अपनी सक्रियता दिखा सके। दूसरा यह कि सरकार चाहती कि शर्मा-सूर्यवंशी के तमाम कारनामे सामने आ जाएं तो जानकारी नहीं देने वाले विभागों का नेतृत्व बदल देती। दलदल और भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। अब तो असंख्य टन लोहा पिघलाकर इनकी जड़ों में भर दिया जाए, जहां से इनके अंकुर निकलना बंद हो जाए। इन्हें दोबारा रोपने की हिमाकत कोई न कर सके।
Anil choudhary

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