चलता रहे जुलूस का दौर
गुंडाराज के खिलाफ पुलिस के अभियान ने आवाम को थोड़ी राहत दी है। पुलिस ने कुख्यात बदमाश मुख्तार मलिक समेत उसके नौ गुर्गोंं का राजधानी भोपाल में जुलूस निकाला। उधर, ग्वालियर में हुई लाखों की लूट का पर्दाफाश भी पुलिस ने महज तीन दिन में कर दिया। यानी पुलिस दिलेरी से काम ले रही है। यह काबिले तारीफ है, लेकिन संतुष्टिजनक सफलता तभी मिलेगी जब जुलूस का यह दौर अनवरत चले। इंदौर में गुंडाराज के खिलाफ ५०० जवान अलग से दिए गए हैं। यानी बिगड़ैल कानून व्यवस्था से शासन-प्रशासन चिंतित है। वहीं, सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं और बदमाशों के संबंध उजागर होने के बाद पार्टी के पदाधिकारी चेतावनी दे रहे हैं। मसलन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने खंडवा में प्रदेश कार्यसमिति में कहा कि 'कार्यकर्ता प्रशासन के कार्यों में दखल न दें।Ó इससे पार्टी की छवि खराब होती है। वे अपनी बात विधायक और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाएं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी कार्यकताओं से दो टूक कहा कि वे ऐसा काम न करें, जिससे पार्टी की छवि खराब हो। वहीं, गुंडों को चेतावनी दी कि प्रदेश में एक भी गुंडा नहीं रहेगा। उन्होंने अफसरों से कहा 'जहां दिखें गुंडे, वहां चलाओ डंडे।Ó भाजपा अध्यक्ष की नसीहत से जाहिर होता है कि कुछ कार्यकर्ता प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री की चेतावनी और नसीहत से साफ होता है कि गुंडों-बदमाशों की करतूतों से वे चिंतित हैं। उनकी यह मंशा जनहित में है। दरअसल, पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें भाजपा के कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर दबाव बनाकर गुंडों बदमाशों को जमानत दिलवाई। कुछ मामले जबरिया दर्ज भी कराए। गुंडाराज के खिलाफ अभियान पार्टी की सुचिता बनाए रखने का भी प्रयास है। देखना यह है कि ये अभियान कब तक चल पाता है। सवाल यह है कि असमाजिक तत्वों और कार्यकर्ताओं के संबंध एकदम कैसे खत्म हो जाएंगे? इसके लिए कार्यकर्ताओं को ईमानदार इच्छाशक्ति से काम करना होगा। धवल छवि की मंशा वाले दल के नीति नियंताओं को चाहिए कि वे ऐसे कार्यकर्ताओं को निकाल बाहर करें, जिनके इनसे संबंध हैं।

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