ये तंद्रा तोड़ो

ये तंद्रा तोड़ो

नगर निगम अपर आयुक्त के मामले पर राज्य सरकार के दो मंत्री पर्दा डाल रहे हैं। मंत्रियों की चुप्पी भ्रष्ट अफसरों को बढ़ावा दे रही है। पांच दिन का मौन तोड़ते हुए प्रदेश कांग्रेस ने अपने होने का अहसास कराया। देर से ही सही, लेकिन विपक्ष ने प्रशासन में अंगद की तरह पैर जमाए डटे भ्रष्ट आला अफसरों पर बड़े सवाल उठाए हैं। वहीं, भोपाल ननि अपर आयुक्त जीपी माली और अतिक्रमण निरीक्षक सुभाष बाथम के मामले में 'राज्य सरकार और 'शहर सरकार कुंभकर्णी नींद से नहीं जागी। जबकि, कुछ संगठनों ने प्रदर्शन की दोनों आला अधिकारियों के निलंबन की मांग भी की है। इसके बावजूद बेअसर प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। मानो कानों में बर्फ जमी हो, लेकिन उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता का हक मारने वाले भ्रष्टों की पैरवी करने से आवाम के मन में नाउम्मीदी उपजी है। उसे यह शाश्वत सत्य भी अपने दिमाग में बैठाकर रखना चाहिए कि आवाम के हितार्थ राजनियमों और हकों की अवहेलना करने वालों का हिसाब आवाम ही करती है। घोर ताज्जुव की बात है कि जिस शहर सरकार के तमाम बड़े कार्यों का क्रियान्वयन इन आला अफसरों के हाथों होता है, उनकी कार्यप्रणाली और चरित्र की स्याह तस्वीर सामने आने के बावजूद वह नि:शब्द है। दो जिम्मेदार मंत्री भी बोलने से बच रहे हैं। इनमें से एक मंत्री के विभाग से नगर निगम का सीधा सरोकार है। और, दूसरे जिले के प्रभारी मंत्री हैं। ऐसे में शासन के वे वादे झूठे साबित हो रहे हैं, जो उसने कई छोटे-बड़े जन सम्मेलनों में भ्रष्ट अफसरों को नहीं बख्शने के संबंध में किए हैं। होना तो यह चाहिए कि शासन अपने वादों और घोषणाओं पर कायम रहते हुए पड़ताल कर भ्रष्टों को चुन-चुनकर बाहर निकाल दे। भ्रष्ट आचरण करने वाले अफसरों की पैरवी की जो बात विपक्ष कह रहा है, उसका जवाब कार्रवाई से दे। वरना 'राज्य सरकार और 'शहर सरकार का यह मौन विपक्ष की बातों की स्वीकृति नहीं तो और क्या है? इस बात में कोई दोमत नहीं कि 'राजतंत्र के गैरजिम्मेदाराना रवैये से जनाधार प्रभावित होगा। अपनी छवि और जनाधार बचाने के लिए दोनों 'सरकारों और मंत्रियों को कुंभकर्णी तंद्रा से जागकर आवाम की आवाज सुनना चाहिए।

- अनिल चौधरी

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