नारी तुम चंडी बनो
इंदौर के बेटमा में दो युवतियों के साथ गैंगरेप के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार और इंदौर पुलिस से जवाब तलब किया है। गैंगरेप में १४ युवक शामिल थे। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड शाखा की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश में २०११ में बलात्कार के सबसे ज्यादा १२६२ मामले मध्यप्रदेश में दर्ज हुए हैं। इसमें इंदौर सबसे ऊपर और दूसरे नंबर पर भोपाल है। इधर, विधानसभा में मानसून सत्र के पहले दिन गृहमंत्री ने बताया कि जनवरी से २० जून तक ज्यादती के १५४२ मामले दर्ज हुए। यानी लगभग गुणोत्तर वृद्धि हुई है। महिलाएं कहां सुरक्षित हैं? यह सवाल सभी के लिए है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में बलात्कार के मामलों में २५.४ फीसदी बढ़ोतरी हुई है। यहां हाल ही में एक युवती से पांच लोगों ने गैंगरेप किया। सफदरजंग के अस्पताल में गर्भवती से बलात्कार की कोशिश की गई। गुवाहाटी की घटना ने भी सभी को झकझोर दिया। जाहिर सी बात है, महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। इन मामलों में स्थानीय स्तर पर देखें तो पुलिस व प्रशासन और राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय महिला आयोग के रवैये से लोगों में नाउम्मीदी बनी है। कई लोग पीडि़ताओं को हिकारत की नजर से देखते हैं। जैसे वे अपराधी हों। ऐसे हालातों के बीच दिल्ली की एक लेखिका की चर्चित किताब की लाइन याद आती है, जिसमें उनकी सहेली की सलाह का जिक्र है- 'बाहर जा रही हो, अपने लेडी पर्स मेें छुरा रखना मत भूलना।Ó उनकी यह सलाह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। अब ऐसे हालात देशभर में व्याप्त हैं कि लेडी पर्स में छुरा होना चाहिए। क्योंकि, दरिंदों की कमी नहीं है, जो युवतियों को ऐसे देखते हैं जैसे वे उनकी शिकार होने के लिए ही बनी हों। इन दुष्टों का नाश करने के लिए नारी को चंडी अवतार लेना होगा। उसे आदमी की खाल ओढ़कर घूम रहे आदमखोरों को मारना होगा। मानव मन को झिझोड़ देने वाली इन वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए लचीला और पेचीदा नहीं कठोर कानून चाहिए, जिसमें त्वरित न्याय की  भी व्यवस्था हो। बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों, मनोविज्ञानियों और सामाजिक व महिलाओं के संगठनों को निंदा प्रस्ताव से बाहर समाधानमूलक राह सुझानी चाहिए।
- अनिल चौधरी, पत्रिका में प्रकाशित

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