ईमानदार मंशा
गुंडाराज के खिलाफ शासन-प्रशासन के अभियान ने आवाम को थोड़ी राहत दी है। इंदौर में मौजूदा कानून व्यवस्था काबिले तारीफ है, जहां गुंडों पर नकेल कसने के लिए ५०० जवान अलग से दिए गए हैं। यहां गुंडा अभियान के तहत गणेशोत्सव समितियों के सदस्यों का पुलिस वेरिफिकेशन भी किया जाएगा। कानून व्यवस्था में यह सुधार तब आया जब इंदौर में गुंडाराज चरम पर था। यानी बिगड़ैल व्यवस्था से शासन-प्रशासन चिंतित है। वहीं, सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं और बदमाशों के संबंध उजागर होने के बाद पार्टी के पदाधिकारी चेतावनी दे रहे हैं। मसलन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने खंडवा में प्रदेश कार्यसमिति में कहा कि 'कार्यकर्ता प्रशासन के कार्यों में दखल न दें।Ó इससे पार्टी की छवि खराब होती है। वे अपनी बात विधायक और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाएं। वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी कार्यकताओं से दो टूक कहा कि वे ऐसा काम न करें, जिससे पार्टी की छवि खराब हो। वहीं, गुंडों को चेतावनी दी कि प्रदेश में एक भी गुंडा नहीं रहेगा। उन्होंने अफसरों से कहा 'जहां दिखें गुंडे, वहां चलाओ डंडे।Ó भाजपा अध्यक्ष की नसीहत से जाहिर होता है कि कुछ कार्यकर्ता प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री की चेतावनी और नसीहत से साफ होता है कि गुंडों-बदमाशों की गतिविधियों से वे चिंतित हैं। उन्हें आवाम की खुशी चाहिए। उनकी यह मंशा जनकल्याणकारी है। दरअसल, पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें भाजपा के कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर दबाव बनाकर गुंडों बदमाशों को जमानत दिलवाई। कुछ मामले जबरिया दर्ज भी कराए। इन्हें गंभीरता से लेते हुए गुंडाराज के खिलाफ अभियान शुरू किया गया। यह पार्टी की सुचिता बनाए रखने का भी प्रयास है। लेकिन, सवाल यह है कि गुंडों-बदमाशों और कार्यकर्ताओं के संबंध एकदम से कैसे खत्म हो जाएंगे? इसके लिए पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता को ईमानदार इच्छाशक्ति से काम करना होगा। धवल छवि की मंशा रखने वाले दल के नीति नियंताओं को चाहिए कि वे ऐसे कार्यकर्ताओं को निकाल बाहर करें, जिनके इन लोगों से संबंध हैं।
- अनिल चौधरी

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