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Showing posts from July, 2010

तकनीकी अभिशाप और पुरुषवादी विज्ञापन

विज्ञापन किसी भी संदेश को विशाल जनसमुदाय तक पहुंचाने का नफीस तरीका है। यह आपकी बात चित्रों और शब्दों के साथ लोगों तक पहुंचाता है, लेकिन यह चिंताजनक तब हो जाता है जब सही समझ के साथ नहीं किया गया हो। इन दिनों परिवार नियोजन के लिए दिए जा रहे विज्ञापनों में पुरुषवादी मानसिकता साफ झलकती है। इसमें पचास से अधिक लड़कियों को पानी ढोते कतारबध्द दिखाया गया है। 'संदेश है एक अरब चौदह करोड़ में यह हाल है तो आगे क्या होगा?' इसमें परिवार नियोजन की अपील भी की गई है। लड़कियों की इस कतार से लगता है कि हमारे यहां इनकी संख्या ज्यादा है। कुछ वर्ष पूर्व एक विज्ञापन और आया था 'बेटी नहीं बचाओगे तो बहू कहां से लाओगे।' इससे लगता है कि हम सिर्फ बहू लाने ओर वंश बढ़ाने के लिए बेटियां बचाने चाहते हैं। होना तो यह चाहिए कि हम बढ़ती आबादी रोकने के साथ ही घटते लिंगानुपात पर भी लोगों का जागरूक करें, ताकि दोहरा और प्रथमदृष्टया सही संदेश जा सके। तेजी से घटता लिंगानुपात राष्ट्रीय चुनौती बन चुकी है। गुजरात-राजस्थान की सीमा के दांग जिले में एक लड़की से आठ भाइयों की शादी कर दी गई। राजस्थान के...

केंद्र के फैसले पर प्रदेश की हवाई आंकड़ेबाजी

महेश्वर बांध के निर्माण कार्य पर केंद्र के रोक लगाने से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नाराज हैं। वे इसे केंद्र का गरीब और विकास विरोधी निर्णय बता रहे हैं। इससे रोक हटाने की मांग करते हुए उन्होंने खर्च के तमाम आंकड़े गिना दिए। लेकिन उन लोगों की संख्या और उनकी खेती के रकबे की बात नहीं कीए जो इस बांध के पानी की जद में आने वाले हैं। जिन्हें बेकवाटर सर्वे किए बिना ही अधिग्रहण अधिनियम की धारा.चार के तहत नोटिस थमाए जा रहे हैं। यानी उन्हें चेतावनी दी जा रही है कि जमीन और गांव से बेदखल कर दिए जाएंगे। यदि मुख्यमंत्री को खर्च के आंकड़े याद हैंए तो इस जन पशुधन और जमीन के आंकड़ों की जानकारी भी होगी तो फिर उनकी बात क्यों नहीं करते। महेश्वर परियोजना सरकार की बहुप्रतीक्षित है। सिंह की मानें तो नवंबर से 7ण्2 लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली उत्पादन और इंदौर व देवास को 36 करोड़ लीटर पानी मुहैया कराना था। यह लक्ष्य पिछड़ जाएगा। बिजली घर पर 2500 और इंदौर व देवास को पानी देने के लिए 517 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। यानी सरकार को तमाम आंकड़ों की जानकारी है। तो फिर यह भी मालूम होगा कि महेश्वर बांध की जद म...

यह कानून पुष्ट होगा न सरकार

मध्यप्रदेश में तीन दिनों में 17 फीसदी कुपोषण कम हो गया। है न हैरत में डालने वाली बात। जब मलेरिया से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता हैए तब स्वास्थ्य मंत्री इस पर नियंत्रण की हिदायत सीएमएचओ को देते हैं। और दूसरे ही दिन की रिपोर्ट में मलेरिया से होने वाली मौत का एक भी मामला नहीं रहता है। यह बात और है कि तेज बुखार से मरने वालों की संख्या यकायक बढ़ जाती है। प्रदेश की राजधानी में सवा तीन हजार बच्चे कुपोषित हैं। ये सभी चमत्कार हमारे यहीं हो सकते हैं। इस बीच पेट भरने का दावा करने वाले भोजन का अधिकार कानून के आने की घोषणा केंद्र सरकार के प्रतिनिधि न्यूयार्क में सोशलिस्ट इंटरनेशनल बैठक में करते हैं। यानी हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अन्नदाता होने की बात कहकर खुद की पीठ थपथपाने से नहीं चूकते हैं। बहरहाल देशए प्रदेश के गरीबों की बदहाल तस्वीर और कानून से उम्मीदों की बात हो जाए। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के तीसरे चरण के रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश में 60 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। इतना ही नहींए इनमें से लगभग 13 लाख बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैंए जिनकी जीवनलीला का पर्दा किसी भी वक्त गिर सकता...