तकनीकी अभिशाप और पुरुषवादी विज्ञापन
विज्ञापन किसी भी संदेश को विशाल जनसमुदाय तक पहुंचाने का नफीस तरीका है। यह आपकी बात चित्रों और शब्दों के साथ लोगों तक पहुंचाता है, लेकिन यह चिंताजनक तब हो जाता है जब सही समझ के साथ नहीं किया गया हो। इन दिनों परिवार नियोजन के लिए दिए जा रहे विज्ञापनों में पुरुषवादी मानसिकता साफ झलकती है। इसमें पचास से अधिक लड़कियों को पानी ढोते कतारबध्द दिखाया गया है। 'संदेश है एक अरब चौदह करोड़ में यह हाल है तो आगे क्या होगा?' इसमें परिवार नियोजन की अपील भी की गई है। लड़कियों की इस कतार से लगता है कि हमारे यहां इनकी संख्या ज्यादा है। कुछ वर्ष पूर्व एक विज्ञापन और आया था 'बेटी नहीं बचाओगे तो बहू कहां से लाओगे।' इससे लगता है कि हम सिर्फ बहू लाने ओर वंश बढ़ाने के लिए बेटियां बचाने चाहते हैं। होना तो यह चाहिए कि हम बढ़ती आबादी रोकने के साथ ही घटते लिंगानुपात पर भी लोगों का जागरूक करें, ताकि दोहरा और प्रथमदृष्टया सही संदेश जा सके। तेजी से घटता लिंगानुपात राष्ट्रीय चुनौती बन चुकी है। गुजरात-राजस्थान की सीमा के दांग जिले में एक लड़की से आठ भाइयों की शादी कर दी गई। राजस्थान के...