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कफन ओढ़े कोने में बैठी नैतिकता

शराब कारोबार के सामने नैतिकता का कफन ओढ़े कोने में दुबकी है। शहर के लिए यह एक बेहद डरावना और चिंतनीय वक्त है, जो चमगादड़ की तरह पूरी व्यवस्था के बीच उल्टा लटका हुआ है। इसे समझने के लिए कबीर की उलटबांसियां भी कम हैं। किसी वादे को पूरा कर उसका सियासी फायदा लेने की मंशा में ऐसे काले कारोबार से आंखें मूंद लेना ठीक नहीं। सुधार के वादे-दावे और बहस-मुबाहिसों के कोलाहल में एक ध्वनि भी खोई हुई है। यह ध्वनि एक आर्तनाद है, एक मर्मांतक पुकार है। यह आर्तनाद और पुकार उनकी है, जो अपनी आंखों में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सपना संजोए हैं। अपना पेट काटकर उन्हें पढऩे नजरों से दूर भेज रहे हैं। जिस दिन उन्हें बच्चों के गलत कदम का भान होगा, वे गुस्से से भरे-चढ़े अपने ही नथुनों से खुद के जलते खून की गंध हर पल महसूसने को अभिशप्त महसूस करेंगे। मैं अपने शहर होशंगाबाद की बात कर रहा हूं..... मध्यप्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा नदी के किनारे पांच किलोमीटर दूर तक शराब बिक्री पर रोक लगाकर पिछली भाजपा सरकार ने वाहवाही लूटी। ये कदम निश्चित ही वाहवाही लायक है, लेकिन पुलिस और प्रशासन की ढील के कारण ये सफल नहीं हो सका। इस...