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विकास की कितनी कीमत चुकाएंगे हम

झान्सीघाट का गिरन आदिवासी अब जिंदा नहीं हो सकता। गिरन की दोनों बेटियों को किसी भी कीमत पर (हालांकि वे कोई भी कीमत चुकाने की स्थिति में नहीं हैं।) भी पिता नहीं मिल सकते। और उसकी विधवा अब कभी सुहागिन नहीं बन सकती। ये तीनों नरसिंहपुर जिले के गाडरवाड़ा ब्लाक में झांसीघाट में नर्मदा किनारे बनने वाले थर्मल पॉवर प्लांट का दंश झेलने को अभिशप्त हैं। इतना ही नहीं आसपास के कई गांवों के हरिजन आदिवासी और किसान इस मुसीबत का सामना कर रहे हैं। ये अपनी जमीन बचाने चाहते हैं, तो पॉवर प्लांट निर्माता कंपनी के अफसर और सरकारी मुलाजिम इनकी जमीन अधिग्रहित कर इन्हें भूमिहीन करने पर आमादा हैं। इसके लिए कई हथकंडे अपना रहे हैं। गिरन आदिवासी की मौत इस सदमे में हो गई कि पॉवर प्लांट के लिए उसकी जमीन किसी भी तरह और किसी भी कीमत पर ले ली जाएगी। उस दिन मैसर्स टुडे एनर्जी के अफसरों ने गिरन से उसके घर के सामने ही कहा कि उसकी जमीन पॉवर प्लांट की जद में है। थोड़ी सी जमीन में दो बेटियों की जिम्मेदारी और दो जून की रोटी की जुगाड़ करने वाले गिरन को भूमिहीन हो जाने की खबर ही असहनीय हो चली और अफसरों के सामने ही चंद मिनटों में ही...