तुम राग पुराना लिखना।
बादल, बिजली, चांद ओ तारे, तुम हर जगह दिखना, अमलताश के पत्तों पर फिर तुम गीत पुराना लिखना। जितना भी हो प्रेम हो निश्छल रगों में दौड़े वो फिर हर पल एक ही हों हम न हो दल-दल अदाओं पर दिल जाए मचल रात, चांदनी, खुशबू, चंदन, कुंदन, तुम हर जगह दिखना, गुलमोहर की पंखुडिय़ों पर फिर गीत सुहाना लिखना। आकर फिर तुम मुझे दे दो बल शाम सुहानी कर उड़ाके आँचल आज की हो चिंता न याद रहे कल कर दे मुझको तू ऐसा पागल कल -कल करती मचलती नदी सी उन्मुक्त तुम दिखना, उछलती लहरों से रेत पर फिर तुम राग दिवाना लिखना। दिनभर भागूं तुझको ढूंढू जैसे कोई हिरणी पागल शाम सुहानी कर दे अब तू फिर कहता हूं मत करना छल सितार, संतूर, घुंघरू, मांदल, तुम सभी के स्वर में बसना, फूल पलाश की पंखुडिय़ों पर फिर तुम राग पुराना लिखना।